तमिलनाडु की राजनीति इस समय काफी दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के प्रमुख ने राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है, लेकिन अभी भी उनके पास पूर्ण बहुमत का आंकड़ा नहीं है।
राज्यपाल से की मुलाकात, सरकार बनाने का दावा
बुधवार को विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। उनकी पार्टी, जो अभी लगभग दो साल पहले ही बनी है, इस बार के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है।
234 सीटों वाली विधानसभा में TVK ने 108 सीटों पर जीत हासिल की, जो किसी भी पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
अन्य पार्टियों का प्रदर्शन
इस चुनाव में तमिलनाडु की पारंपरिक बड़ी पार्टियों को बड़ा झटका लगा।
- (DMK) को 59 सीटें मिलीं
- (AIADMK) को 47 सीटों पर जीत मिली
पिछले पांच साल से सत्ता में रही DMK इस बार सत्ता से बाहर हो गई है।
कांग्रेस ने दिया समर्थन
बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों से पीछे रहने के बाद TVK ने सहयोगी तलाशना शुरू किया। इसी बीच (कांग्रेस) ने TVK को समर्थन देने का फैसला किया।
तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी ने चेन्नई में TVK मुख्यालय जाकर विजय से मुलाकात की और समर्थन की पुष्टि की।

फिर भी क्यों अधूरा है बहुमत?
कांग्रेस के समर्थन के बावजूद TVK अभी भी बहुमत से 5 सीट पीछे है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए विजय को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है।
अब क्या हो सकते हैं विकल्प?
सरकार बनाने के लिए TVK के सामने कुछ अहम विकल्प मौजूद हैं:
- निर्दलीय विधायकों का समर्थन लेना
- छोटे दलों से गठबंधन करना
- AIADMK के साथ संभावित समझौता करना
सूत्रों के मुताबिक, TVK ने AIADMK से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया है, हालांकि यह राजनीतिक समीकरण आसान नहीं माना जा रहा है।
DMK ने कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के बाद DMK ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। DMK ने इसे राजनीतिक दूरदर्शिता की कमी बताते हुए कांग्रेस पर गठबंधन सहयोगियों के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया है।
निष्कर्ष
तमिलनाडु में इस समय सत्ता का गणित पूरी तरह खुला हुआ है। TVK सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी है, लेकिन बहुमत से थोड़ी दूरी पर खड़ी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विजय किस तरह से समर्थन जुटाकर सरकार बनाने में सफल होते हैं या राज्य में कोई नया राजनीतिक समीकरण बनता है।







